लेखक: संदीप सारण | कैटेगरी: फाइनेंस/होम लोन
अगर आप बैंक या किसी NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) से होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आवेदन करने से पहले कुछ अहम सवाल अपने होम लोन प्रोवाइडर से ज़रूर पूछने चाहिए। ये सवाल न सिर्फ आपको सही फैसला लेने में मदद करेंगे, बल्कि भविष्य में होने वाली परेशानियों से भी बचाएंगे।
घर खरीदना ज़िंदगी के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण निवेशों में से एक होता है। ऐसे में होम लोन लेते समय की गई एक छोटी-सी गलती भी आपके CIBIL स्कोर पर बुरा असर डाल सकती है और आपकी सालों की बचत को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बिना पूरी जानकारी के लोन लेना आगे चलकर आर्थिक दबाव का कारण बन सकता है।
चाहे आप नया घर या प्लॉट खरीदने की सोच रहे हों, नया मकान बनवाना चाहते हों या अपने पुराने घर का रिनोवेशन कराना हो — इन सभी जरूरतों के लिए होम लोन की आवश्यकता पड़ती है। आज के समय में कई भरोसेमंद बैंक और NBFC किफायती ब्याज दरों और आकर्षक ऑफर्स के साथ अलग-अलग होम लोन स्कीम्स उपलब्ध कराते हैं, ताकि ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से सही विकल्प चुन सकें।
मान लीजिए आपने अलग-अलग होम लोन प्रोवाइडर्स के ऑफर्स की तुलना कर ली है और अब एक ऐसा विकल्प चुन लिया है जो आपकी आर्थिक स्थिति और जरूरतों के अनुसार सही बैठता है। लेकिन यहीं रुक जाना काफी नहीं है। होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले आपको अपने लोन प्रोवाइडर से कुछ महत्वपूर्ण सवाल ज़रूर पूछने चाहिए, ताकि आखिरी समय में कोई दिक्कत न आए और भविष्य में किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
यह भी पढ़ें
Question 1: बैंक किस-किस प्रकार के होम लोन ऑफर करते हैं और आपके लिए कौन-सा विकल्प सबसे सही रहेगा?
Answer:
भारत में लगभग सभी प्रमुख बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियाँ अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई तरह के होम लोन ऑफर करती हैं। इनमें प्लॉट खरीदने के लिए होम लोन, पहले से बने घर की मरम्मत या विस्तार (एक्सटेंशन) के लिए होम लोन, निर्माणाधीन (Under-Construction) प्रॉपर्टी के लिए होम लोन, रेडी-टू-मूव घर के लिए होम लोन और एनआरआई (NRI) होम लोन जैसे विकल्प शामिल होते हैं। हर होम लोन स्कीम का उद्देश्य अलग होता है ताकि हर व्यक्ति अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सही फैसला ले सके।
जब आप बैंक द्वारा दिए जाने वाले अलग-अलग होम लोन विकल्पों को अच्छे से समझ लेते हैं, तब आपके लिए सही लोन चुनना आसान हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आप अपने मौजूदा घर में एक नया कमरा या फ्लोर जोड़ना चाहते हैं, तो सामान्य होम लोन की बजाय होम एक्सटेंशन लोन आपके लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले अपनी जरूरत को स्पष्ट करना बहुत जरूरी होता है।
Question 2: बैंक मेरी होम लोन पात्रता (Eligibility) कैसे तय करता है?
Answer:
होम लोन लेने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि बैंक आपकी पात्रता किस आधार पर तय करता है। आमतौर पर अधिकतर बैंक आपकी मौजूदा मासिक आय के लगभग 50 से 60 गुना तक होम लोन देने पर विचार करते हैं। हालांकि, बैंक आपकी सैलरी के सभी हिस्सों को नहीं गिनते, जैसे कि लीव ट्रैवल अलाउंस या मेडिकल अलाउंस को अक्सर पात्रता गणना में शामिल नहीं किया जाता।
इसके अलावा, बैंक आपका CIBIL स्कोर, पहले से चल रहे किसी अन्य लोन की EMI और आपकी कुल वित्तीय जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखते हैं। अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है और आपकी EMI का बोझ सीमित है, तो आपकी होम लोन एलिजिबिलिटी बढ़ सकती है। इसलिए होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपने लेंडर से यह साफ-साफ समझ लेना चाहिए कि वह किन-किन बातों के आधार पर आपकी पात्रता तय कर रहा है।
Question 3: क्या CIBIL (क्रेडिट) स्कोर मेरे होम लोन की ब्याज दर को प्रभावित करता है?
हाँ, बिल्कुल। CIBIL या क्रेडिट स्कोर आपके होम लोन की ब्याज दर तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। बैंक या वित्तीय संस्थान लोन देने से पहले आपके क्रेडिट स्कोर को देखकर यह समझते हैं कि आप समय पर लोन चुकाने में कितने भरोसेमंद हैं। आमतौर पर 750 या उससे अधिक का क्रेडिट स्कोर अच्छा माना जाता है और ऐसे आवेदकों को कम ब्याज दर पर होम लोन मिलने की संभावना ज्यादा होती है। अगर आपका स्कोर 700 से कम है, तो बैंक या तो आपका लोन आवेदन रिजेक्ट कर सकता है या फिर आपको ज्यादा ब्याज दर पर लोन ऑफर किया जा सकता है। इसलिए होम लोन लेने से पहले अपने क्रेडिट स्कोर के आधार पर सबसे कम ब्याज दर क्या मिल सकती है, यह जरूर पूछना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर,
मान लीजिए आप एक सैलरीड व्यक्ति हैं और आपकी मासिक आय ₹1 लाख से ज्यादा है। आप ₹40 लाख का होम लोन लेना चाहते हैं, लेकिन आपका क्रेडिट स्कोर 680 है। ऐसी स्थिति में बैंक या तो आपका होम लोन अप्रूव न करे या फिर करीब 12% जैसी ऊँची ब्याज दर पर लोन दे सकता है।
वहीं दूसरी ओर, आपके एक दोस्त की मासिक आय ₹7 लाख है और उसका क्रेडिट स्कोर 750 है। वह ₹50 लाख का होम लोन लेना चाहता है। इस स्थिति में बैंक उसे 6% से 7% सालाना जैसी कम ब्याज दर पर होम लोन देने के लिए तैयार हो सकता है। इससे साफ है कि अच्छा क्रेडिट स्कोर सीधे तौर पर आपकी ब्याज दर को कम करने में मदद करता है।
यह भी पढ़ें
Question 4: क्या आपके होम लोन पर मिलने वाली ब्याज दर फिक्स्ड है या फ्लोटिंग?
होम लोन लेते समय ब्याज दर का प्रकार समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि ब्याज दर में थोड़ा-सा भी फर्क आपके कुल लोन अमाउंट और EMI पर बड़ा असर डाल सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले अपने बैंक या लेंडर से यह जरूर पूछें कि आपके होम लोन की ब्याज दर फिक्स्ड होगी या फ्लोटिंग, और उसका वार्षिक प्रतिशत दर (APR) कितना है। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि भविष्य में ब्याज दर बढ़ने या घटने का आपके ऊपर क्या असर पड़ेगा।
होम लोन पर आमतौर पर ये ब्याज दर विकल्प उपलब्ध होते हैं:
- Fixed Interest Rate Home Loan: इसमें पूरे लोन टेन्योर के दौरान ब्याज दर समान रहती है। EMI पहले से तय होती है और भविष्य में ब्याज दर बढ़ने का कोई जोखिम नहीं होता।
- Floating Interest Rate Home Loan: इसमें ब्याज दर RBI की नीतियों और बाजार की आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। ब्याज दर घटने पर EMI कम हो सकती है, लेकिन बढ़ने पर EMI या लोन अवधि बढ़ सकती है।
- Fixed और Variable Interest Rate Home Loan: इसमें शुरुआत के कुछ सालों तक ब्याज दर फिक्स रहती है और उसके बाद यह फ्लोटिंग में बदल जाती है। यह विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो शुरुआती समय में स्थिर EMI चाहते हैं।
Important Tip: होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ब्याज दरों की तुलना जरूर करें। सही तुलना करके आप ब्याज में अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं और अपनी मेहनत की कमाई को अन्य ज़रूरी जीवन लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
Question 5: आपके लिए होम लोन की आदर्श अवधि (Tenure) क्या होनी चाहिए?
उत्तर:
आमतौर पर भारत में ज़्यादातर बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां होम लोन की अवधि 1 साल से लेकर 30 साल तक देती हैं। लेकिन “आदर्श होम लोन अवधि” हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है, क्योंकि यह आपकी आय, उम्र, मासिक खर्च, भविष्य की ज़रूरतों और वित्तीय स्थिरता पर निर्भर करती है। इसलिए लोन लेने से पहले अपने लेंडर से यह ज़रूर पूछना चाहिए कि आपके प्रोफाइल के हिसाब से कौन-कौन सी अवधि उपलब्ध है, क्योंकि आपकी EMI पूरी तरह उसी अवधि पर निर्भर करती है जिसे आप चुनते हैं।
अगर आप लंबी अवधि (Long Tenure) चुनते हैं, तो आपकी मासिक EMI कम हो जाती है, जिससे महीने का बजट संभालना आसान होता है। वहीं, कम अवधि (Short Tenure) लेने पर EMI ज़्यादा होती है, लेकिन कुल ब्याज कम देना पड़ता है और लोन जल्दी खत्म हो जाता है। इसलिए सही संतुलन बनाना ज़रूरी है—ऐसी अवधि चुनें जिसमें EMI भी मैनेज हो और ब्याज का बोझ भी ज़्यादा न पड़े। अवधि तय करने के बाद आप उसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
अपने लिए सही EMI समझने के लिए आप Gharkosajao Home Loan EMI Calculator का उपयोग कर सकते हैं। इसमें आपको सिर्फ तीन जानकारी भरनी होती है—लोन अमाउंट, लोन अवधि (Tenure) और ब्याज दर (Interest Rate)। आमतौर पर एक ही ब्याज दर अलग-अलग अमाउंट और अवधि पर लागू रहती है, जिससे आप अलग-अलग विकल्पों की तुलना आसानी से कर सकते हैं।
अब इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। नीचे दिया गया उदाहरण 6.70% सालाना ब्याज दर पर आधारित है, जिससे आपको साफ समझ आएगा कि अवधि बदलने से EMI पर कितना असर पड़ता है।
होम लोन EMI उदाहरण (6.70% प्रति वर्ष)
| लोन राशि | 10 साल की EMI | 20 साल की EMI | 30 साल की EMI |
|---|---|---|---|
| ₹30 लाख | ₹34,371 | ₹22,722 | ₹19,358 |
| ₹55 लाख | ₹63,013 | ₹41,657 | ₹35,490 |
| ₹90 लाख | ₹1,03,112 | ₹68,166 | ₹58,075 |
संक्षेप में समझें:
इस टेबल से साफ पता चलता है कि जैसे-जैसे लोन की अवधि बढ़ती है, EMI कम होती जाती है। इसलिए आदर्श होम लोन अवधि वही मानी जाती है जो आपकी मासिक आय पर बोझ न डाले, साथ ही लंबे समय में आपके वित्तीय लक्ष्यों को भी प्रभावित न करे।
Question 6: होम लोन प्रोसेसिंग फीस क्या होती है?
Answer:
जब आपका होम लोन आवेदन बैंक द्वारा स्वीकृत (Approved) हो जाता है, तो लोन की राशि जारी करने से पहले बैंक एक प्रोसेसिंग फीस वसूलता है। यह फीस अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग हो सकती है और आमतौर पर लोन अमाउंट का लगभग 0.5% से 2.50% तक होती है। भले ही यह राशि पहली नजर में कम लगे, लेकिन अगर आपको पहले से इसकी जानकारी न हो तो यह आपके लिए एक अतिरिक्त खर्च बन सकती है। इसलिए होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपने लेंडर से यह जरूर पूछ लें कि प्रोसेसिंग फीस कितनी है, क्या इसमें कोई टैक्स शामिल है और क्या यह नॉन-रिफंडेबल है या नहीं।
Question 7: होम लोन पर प्रीपेमेंट चार्जेस क्या होते हैं?
Answer:
अगर आपकी आय बढ़ जाती है, प्रमोशन मिल जाता है, बिजनेस में मुनाफा होने लगता है या आपकी आर्थिक स्थिति किसी भी कारण से बेहतर हो जाती है, तो आप अपने होम लोन की बची हुई EMI एकमुश्त चुकाना चाह सकते हैं। इसे प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर कहा जाता है। कई बैंक होम लोन को समय से पहले बंद करने पर एक निश्चित प्रीपेमेंट फीस लेते हैं। इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि अगर आप भविष्य में लोन जल्दी चुकाना चाहें, तो आपको कितनी अतिरिक्त फीस देनी पड़ेगी।
अक्सर बैंक इस सवाल से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन आपको साफ-साफ पूछना चाहिए कि समय से पहले लोन चुकाने पर कोई प्रीपेमेंट चार्ज लगेगा या नहीं। अगर कोई चार्ज नहीं है, तो यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। लेकिन अगर चार्ज लागू होता है, तो होम लोन लेने से पहले उसकी गणना जरूर कर लें, ताकि बाद में कोई आर्थिक बोझ न पड़े।
यह भी पढ़ें
Question 8: क्या होम लोन के साथ कोई अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट लेना जरूरी होता है?
Answer:
कई बैंक और वित्तीय संस्थान होम लोन जारी करते समय होम इंश्योरेंस या लाइफ इंश्योरेंस लेना अनिवार्य कर देते हैं। अक्सर लोन डिस्बर्समेंट के समय यह शर्त रखी जाती है, जिससे ग्राहक के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचता। इसलिए पहले से यह पूछना बेहद जरूरी है कि क्या होम लोन के साथ किसी प्रकार का बीमा लेना जरूरी है या नहीं।
इसके साथ ही यह भी जान लें कि उस इंश्योरेंस का प्रीमियम कितना होगा और क्या आप अपनी पसंद की किसी दूसरी इंश्योरेंस कंपनी से पॉलिसी ले सकते हैं। पहले से जानकारी होने पर आप सही निर्णय ले पाएंगे और अनावश्यक खर्च से बच सकेंगे।
Question 9: क्या होम लोन में को-एप्लीकेंट जोड़ा जा सकता है?
Answer:
अगर आप अकेले होम लोन की पात्रता (Eligibility) पूरी नहीं कर पा रहे हैं, तो आप किसी को-एप्लीकेंट के साथ होम लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। को-एप्लीकेंट के रूप में जीवनसाथी, माता-पिता, बेटा या अविवाहित बेटी को शामिल किया जा सकता है। इससे आपकी संयुक्त आय जुड़ जाती है और लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
इसलिए लोन लेने से पहले अपने बैंक से यह जरूर पूछें कि को-एप्लीकेंट जोड़ने की अनुमति है या नहीं, कौन-कौन को-एप्लीकेंट बन सकता है और इससे लोन अमाउंट व ब्याज दर पर क्या असर पड़ेगा। सही जानकारी के साथ आप अपने होम लोन को आसान और बेहतर बना सकते हैं।
Question 10: होम लोन के लिए आवेदन करते समय कौन-कौन से दस्तावेज़ जरूरी होते हैं?
उत्तर:
होम लोन के लिए आवेदन करते समय कुछ सामान्य और कुछ विशेष दस्तावेज़ जमा करना अनिवार्य होता है। सामान्य दस्तावेज़ों में प्रॉपर्टी से जुड़े कागज़ जैसे सेल डीड (Sale Deed), पज़ेशन सर्टिफिकेट, एनओसी (NOC) आदि शामिल होते हैं। इसके अलावा केवाईसी (KYC) दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड आदि भी हर आवेदक को देने होते हैं। हालांकि, नौकरीपेशा (Salaried) और स्व-रोज़गार (Self-Employed) लोगों के लिए कुछ अतिरिक्त दस्तावेज़ अलग-अलग हो सकते हैं, जो उनके काम की प्रकृति पर निर्भर करते हैं।
अगर आप नौकरीपेशा व्यक्ति हैं, तो आमतौर पर आपको पिछले 3 महीनों की सैलरी स्लिप, पिछले 6 महीनों का बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 16 और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) जैसे दस्तावेज़ जमा करने होते हैं। वहीं, अगर आप स्व-रोज़गार व्यक्ति हैं, तो बिज़नेस के अस्तित्व का प्रमाण (जैसे पार्टनरशिप डीड या जीएसटी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट), प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट, बैलेंस शीट और पिछले 6 महीनों का बैंक स्टेटमेंट देना पड़ सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने लेंडर से सभी आवश्यक दस्तावेज़ों की पूरी जानकारी जरूर ले लें और यह सुनिश्चित करें कि सभी कागज़ सही और पूरे हों, क्योंकि अधूरे या गलत दस्तावेज़ देने पर होम लोन आवेदन रिजेक्ट हो सकता है।
Question 11: होम लोन लेने पर लेंडर आपको कौन-कौन सी अतिरिक्त सुविधाएं दे सकता है?
उत्तर:
आज के समय में होम लोन मार्केट में कई नए बैंक और एनबीएफसी (NBFC) आ चुके हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। इसी वजह से ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए लेंडर सिर्फ लोन ही नहीं, बल्कि कई अतिरिक्त सुविधाएं भी ऑफर करते हैं। इनमें फ्री लाइफ इंश्योरेंस, टॉप-अप लोन की सुविधा, कुछ समय के लिए मोराटोरियम पीरियड (EMI में राहत) जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
ये अतिरिक्त फायदे आपके लिए पैसों की बचत करने में मददगार साबित हो सकते हैं और आप इनका उपयोग अन्य जरूरी खर्चों को मैनेज करने के लिए कर सकते हैं। इसलिए होम लोन लेने से पहले इन सभी सुविधाओं को अच्छे से समझ लेना जरूरी है, ताकि आप सही प्लानिंग कर सकें और भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो।
Question 12: क्या होम लोन में कानूनी (लीगल) खर्च भी कवर होते हैं?
उत्तर:
होम लोन से जुड़े कुछ वैधानिक खर्च होते हैं, जैसे रजिस्ट्रेशन फीस, स्टांप ड्यूटी और अन्य छोटे-मोटे खर्च, जिनमें लीगल फीस भी शामिल हो सकती है। आमतौर पर बैंक और लेंडर इन वैधानिक खर्चों को होम लोन की राशि में शामिल नहीं करते।
इसीलिए होम लोन के लिए आवेदन फॉर्म भरने से पहले अपने लेंडर से यह जरूर पूछ लें कि कौन-कौन से खर्च लोन में कवर होंगे और कौन से आपको अलग से देने होंगे। इससे आपको पहले से ही अपने बजट की सही योजना बनाने में मदद मिलेगी और बाद में किसी तरह का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
यह भी पढ़ें
होम लोन लेने से पहले अपने लोन प्रोवाइडर से पूछे जाने वाले अतिरिक्त सवाल
होम लोन लेते समय सिर्फ EMI और ब्याज दर देखना ही काफी नहीं होता। कई बार अतिरिक्त शुल्क, LTV रेशियो और इंटरेस्ट रेट रीसेट जैसी बातें लंबे समय में आपके लोन को महंगा या सस्ता बना देती हैं। अगर आप इन पहलुओं को पहले ही समझ लेते हैं, तो भविष्य में किसी तरह की परेशानी नहीं होती और आपका फाइनेंशियल प्लान ज्यादा मजबूत बनता है। नीचे इन सभी जरूरी बातों को आसान और क्रमबद्ध तरीके से समझाया गया है।
एक-बार और समय-समय पर लगने वाले शुल्क (One-time and Periodic Fees)
जब आप होम लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो आपको सिर्फ हर महीने की EMI ही नहीं देनी होती, बल्कि इसके अलावा भी कुछ अतिरिक्त शुल्क देने पड़ते हैं। ये शुल्क बैंक या वित्तीय संस्था के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ फीस एक बार ली जाती है, जबकि कुछ चार्ज समय-समय पर भी लग सकते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले इन चार्जेस को समझना बहुत जरूरी है, ताकि बाद में कोई छुपा हुआ खर्च सामने न आए।
आमतौर पर होम लोन में लगने वाले सामान्य शुल्क इस प्रकार होते हैं:
- लीगल रिव्यू फीस – इसमें प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज़ों की कानूनी जांच की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संपत्ति पर कोई विवाद नहीं है।
- एप्रेज़ल फीस (मूल्यांकन शुल्क) – बैंक किसी एक्सपर्ट से प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू का आकलन करवाता है, उसी के लिए यह फीस ली जाती है।
- मॉर्गेज क्रिएशन फीस – प्रॉपर्टी को गिरवी रखने और सरकारी रिकॉर्ड में रजिस्ट्रेशन के लिए यह शुल्क लगता है।
- प्रोसेसिंग फीस – लोन आवेदन की जांच और अप्रूवल प्रक्रिया के लिए एक बार लिया जाने वाला चार्ज।
- एडमिनिस्ट्रेटिव फीस – कुछ बैंक अंदरूनी प्रोसेसिंग और डॉक्यूमेंटेशन के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक शुल्क भी लेते हैं।
LTV रेशियो क्या है और यह क्यों जरूरी है?
LTV यानी Loan to Value Ratio यह बताता है कि बैंक किसी प्रॉपर्टी की कुल कीमत का कितना प्रतिशत आपको लोन के रूप में देगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी घर की कीमत ₹50 लाख है और बैंक 80% LTV देता है, तो आपको ₹40 लाख तक का लोन मिल सकता है और बाकी ₹10 लाख आपको खुद डाउन पेमेंट के रूप में देने होंगे।
कम LTV का मतलब है ज्यादा डाउन पेमेंट, जबकि ज्यादा LTV में बैंक ज्यादा फंड देता है लेकिन जांच भी कड़ी हो सकती है। इस रेशियो को समझना इसलिए जरूरी है ताकि आप पहले से अपनी सेविंग्स और बजट की सही योजना बना सकें।
इंटरेस्ट रेट रीसेट साइकिल को समझना क्यों जरूरी है?
अगर आपने फ्लोटिंग रेट होम लोन लिया है, तो बैंक समय-समय पर आपकी ब्याज दर में बदलाव करता है। यह बदलाव किसी बेंचमार्क से जुड़ा होता है, जैसे कि रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) या बैंक की इंटरनल लेंडिंग रेट।
आपको अपने लेंडर से दो अहम सवाल जरूर पूछने चाहिए:
पहला, ब्याज दर कितने समय में रीसेट होती है? और दूसरा, वह किस बेंचमार्क से जुड़ी है?
इन सवालों के जवाब से आपको अंदाजा रहेगा कि भविष्य में आपकी EMI बढ़ सकती है या घट सकती है और लोन लंबे समय तक आपके लिए किफायती रहेगा या नहीं।
अंतिम लेकिन जरूरी सवाल
होम लोन लेते समय यह भी जरूर पूछें कि क्या बैंक आपको कोई डेडिकेटेड होम लोन प्रतिनिधि देगा या नहीं। इससे आवेदन के समय या साइनिंग से पहले अगर कोई सवाल या समस्या आती है, तो आपको तुरंत सही व्यक्ति से संपर्क मिल सके।
साथ ही, बैंक का कस्टमर केयर नंबर और ई-मेल आईडी अपने पास जरूर नोट कर लें, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की सहायता आसानी से मिल सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
होम लोन की अधिकतम चुकौती अवधि कितनी होती है?
आमतौर पर भारत में ज़्यादातर बैंक और वित्तीय संस्थान होम लोन के लिए अधिकतम 30 साल तक की चुकौती अवधि (Repayment Period) की सुविधा देते हैं। हालांकि यह अवधि बैंक की पॉलिसी, आपकी उम्र, आय और लोन प्रोफाइल पर भी निर्भर करती है। लंबी अवधि होने से EMI कम हो जाती है, लेकिन कुल ब्याज अधिक देना पड़ सकता है, इसलिए अवधि चुनते समय संतुलन बनाना ज़रूरी है।
EMI का फुल फॉर्म क्या होता है?
EMI का पूरा नाम Equated Monthly Installment होता है। यह वह तय मासिक राशि होती है, जो आपको होम लोन लेने के बाद हर महीने बैंक को चुकानी होती है। EMI में मूलधन (Principal) और ब्याज (Interest) दोनों शामिल होते हैं। लोन की अवधि और ब्याज दर के अनुसार EMI तय होती है और आमतौर पर पूरी अवधि में समान रहती है।
क्या होम लोन उम्र (Age) पर निर्भर करता है?
हाँ, होम लोन आपकी उम्र पर निर्भर करता है। अलग-अलग बैंकों की उम्र सीमा अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर 21 से 65 साल के बीच के लोग होम लोन के लिए पात्र माने जाते हैं। बैंक यह भी देखते हैं कि लोन की पूरी अवधि आपके रिटायरमेंट से पहले पूरी हो सके, ताकि चुकौती में कोई जोखिम न हो।
क्या डिस्बर्समेंट के बाद होम लोन कैंसिल किया जा सकता है?
नहीं, एक बार होम लोन की राशि डिस्बर्स हो जाने के बाद उसे कैंसिल नहीं किया जा सकता। डिस्बर्समेंट से पहले तक आप आवेदन वापस ले सकते हैं, लेकिन उसके बाद लोन एक्टिव माना जाता है। हालांकि, आप चाहें तो बाद में लोन को प्री-पे या फोरक्लोज़ कर सकते हैं, जिसके लिए कुछ शर्तें लागू हो सकती हैं।
EMI निकालने का फॉर्मूला क्या है?
EMI की गणना के लिए यह फॉर्मूला इस्तेमाल किया जाता है:
EMI = P × R × (1 + R)^N / ((1 + R)^N – 1)
यहाँ P लोन अमाउंट, R मासिक ब्याज दर और N महीनों की कुल अवधि को दर्शाता है। इस फॉर्मूले से आपको यह समझने में मदद मिलती है कि आपकी मासिक किस्त कितनी बनेगी।
क्या घर का डाउन पेमेंट होम लोन में शामिल होता है?
नहीं, घर खरीदते समय दिया जाने वाला डाउन पेमेंट होम लोन में शामिल नहीं होता। आमतौर पर बैंक प्रॉपर्टी की कीमत का लगभग 20% डाउन पेमेंट आपसे खुद देने की उम्मीद करते हैं। बाकी राशि के लिए होम लोन दिया जाता है। हालांकि, यह प्रतिशत बैंक, प्रॉपर्टी टाइप और आपकी क्रेडिट प्रोफाइल के अनुसार थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है।
इसी तरह के अन्य लेख को पढ़ने के लिए होम लोन की कैटेगरी पर क्लिक करें।
हमारी सभी कैटेगरी