लेखक: प्रदीप सारण | कैटेगरी: ग्रीन होम
🔰 परिचय
आज के समय में बढ़ता प्रदूषण और महंगे घर एक बड़ी समस्या बन चुके हैं। ऐसे में नारियल के खोल से बना पर्यावरण-अनुकूल घर एक आसान और सस्ता समाधान है। यह घर कम खर्च में बनता है, ठंडा रहता है और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुँचाता। यही वजह है कि यह तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
भारत में तेजी से शहर बढ़ रहे हैं। गांवों से लोग रोज़गार और बेहतर ज़िंदगी की तलाश में शहरों की ओर आ रहे हैं। लेकिन शहरों में रहने के लिए सही और सस्ते घरों की कमी है। इसी वजह से लाखों लोग आज भी झुग्गियों में रहने को मजबूर हैं। अकेले मुंबई की बात करें तो वहां करीब 55 प्रतिशत लोग झुग्गी इलाकों में रहते हैं।
इस बड़ी समस्या का एक आसान और समझदारी भरा हल ढूंढा है मनीष आडवाणी और आर्किटेक्ट जनेल त्रिवेदी ने। उन्होंने एक ऐसा घर बनाने का विचार रखा, जो सस्ता भी हो, पर्यावरण के लिए अच्छा भी हो और आम लोगों के लिए इस्तेमाल करने लायक भी हो।
नारियल के खोल से बना इको-फ्रेंडली घर क्या है? जानिए इसकी कीमत, फायदे, बनाने की प्रक्रिया और यह कैसे प्रदूषण कम करने में मदद करता है। सस्ता, मजबूत और पर्यावरण के लिए सुरक्षित समाधान।
नारियल के खोल से बना इको-फ्रेंडली घर कैसे तैयार हुआ?

इन दोनों की सोच से एक ऐसा इको-फ्रेंडली घर तैयार हुआ, जो नारियल के खोल और बेकार पड़ी चीज़ों (स्क्रैप मटीरियल) से बनाया गया। इस काम में मुंबई के सोमैया विद्या विहार के छात्रों ने भी पूरा सहयोग दिया।
नारियल के खोल आमतौर पर कचरे में फेंक दिए जाते हैं, लेकिन इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करके एक मजबूत और ठंडा घर बनाया जा सकता है। इस तरह का घर कम खर्च में तैयार होता है और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचाता।
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ऐसे घर क्यों हैं ज़रूरी?
- ये घर बहुत कम लागत में बन जाते हैं
- पर्यावरण को कम नुकसान होता है
- बेकार चीज़ों का सही इस्तेमाल होता है
- झुग्गी इलाकों के लिए बेहतर और सुरक्षित विकल्प बन सकता है
दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के तरीके में मददगार
आज दिल्ली का प्रदूषण पूरे देश के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में इको-फ्रेंडली घर और ग्रीन बिल्डिंग्स प्रदूषण कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के तरीके में ऐसे घर इस तरह मदद करते हैं:
- कंक्रीट और सीमेंट का कम इस्तेमाल होता है
- घर के अंदर तापमान संतुलित रहता है, जिससे एसी और कूलर कम चलते हैं
- बेकार चीज़ों का दोबारा इस्तेमाल होता है, जिससे कचरा कम होता है
- पेड़-पौधों और प्राकृतिक चीज़ों को बढ़ावा मिलता है
अगर दिल्ली जैसे शहरों में ऐसे घरों और निर्माण तरीकों को अपनाया जाए, तो हवा की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है और प्रदूषण धीरे-धीरे कम हो सकता है।
भविष्य के लिए एक बेहतर रास्ता
नारियल के खोल से बना यह घर सिर्फ एक प्रयोग नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय के लिए एक नई सोच और बेहतर रास्ता दिखाता है। अगर सरकार, बिल्डर और आम लोग मिलकर ऐसे इको-फ्रेंडली घरों को अपनाएं, तो झुग्गी समस्या और प्रदूषण दोनों का हल निकल सकता है।
साफ हवा, सस्ते घर और बेहतर जीवन – यही इस सोच की सबसे बड़ी खासियत है।
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नारियल से घर बनाने की प्रक्रिया – सस्ता, मजबूत और प्रदूषण कम करने वाला तरीका

आज के समय में जब दिल्ली का प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, तब ऐसे घरों की ज़रूरत है जो पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाएँ। इसी दिशा में एक नया और शानदार विकल्प है – नारियल से बना घर (Coconut House)। यह घर न सिर्फ सस्ता होता है, बल्कि प्रदूषण कम करने में भी मदद करता है।
नारियल से घर बनाने में कौन-कौन सी चीज़ें लगती हैं?
नारियल से घर बनाने के लिए ज़्यादातर रीसाइकल और प्राकृतिक चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे:
- बेकार लकड़ी (Scrap Wood)
- लोहे या धातु के टुकड़े
- नारियल और नारियल के छिलके
इन्हीं चीज़ों से पूरा ढांचा तैयार किया जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि पूरा घर सिर्फ 2 दिन में खड़ा किया जा सकता है।
नारियल के छिलके तैयार करने की प्रक्रिया
घर बनाने से पहले नारियल के छिलकों को अच्छी तरह तैयार किया जाता है:
- पहले नारियल के छिलके इकट्ठा किए जाते हैं
- इन्हें 7–8 दिन तक धूप में सुखाया जाता है
- सूखने के बाद ये छिलके लकड़ी जैसे मजबूत हो जाते हैं
- फिर ज़रूरत के हिसाब से इन्हें पूरे या आधे टुकड़ों में काटा जाता है
- इसके बाद पेंट और कोटिंग की जाती है
अगर कोई नारियल की दीवार बाहर से दिखाना नहीं चाहता, तो उस पर मिट्टी का प्लास्टर किया जा सकता है।
मिट्टी और नारियल की दीवार के फायदे
नारियल और मिट्टी से बनी दीवार के अंदर थोड़ी खाली जगह (खोखलापन) होती है, जिससे:
- गर्मी कम लगती है
- ठंड में घर ज्यादा आरामदायक रहता है
- एसी और कूलर की जरूरत कम होती है
इस तरह यह दीवार नेचुरल इंसुलेटर का काम करती है। पूरा काम लगभग 10–12 दिन में पूरा हो जाता है।
नारियल से बने घर की अलग-अलग दीवारें
नमूने के तौर पर बनाए गए नारियल घर में हर दीवार अलग तरीके से बनाई गई:
- एक दीवार में नारियल के छिलके खुले रखे गए
- दूसरी दीवार पर नारियल के ऊपर मिट्टी का प्लास्टर किया गया
- तीसरी दीवार अंदर की पार्टीशन दीवार थी
- चौथी दीवार एक वर्टिकल गार्डन थी
इस वर्टिकल गार्डन में नारियल के छिलकों का इस्तेमाल करके पौधे लगाए गए, जैसे:
- एलोवेरा
- अजवाइन
- मिर्च
- टमाटर
- बीन्स
दिल्ली के प्रदूषण को कम करने में कैसे मदद करता है नारियल का घर?
नारियल से बने घर दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के तरीके में एक बेहतरीन उदाहरण हैं, क्योंकि:
- सीमेंट और ईंट का कम इस्तेमाल होता है
- पेड़ों और पौधों को बढ़ावा मिलता है
- हवा साफ करने वाले पौधे लगाए जा सकते हैं
- निर्माण के समय प्रदूषण बहुत कम होता है
- यह पूरी तरह ग्रीन और इको-फ्रेंडली होता है
क्यों जरूरी हैं ऐसे ग्रीन घर?
दिल्ली जैसे शहरों में जहां हवा की गुणवत्ता खराब रहती है, वहां ग्रीन और नेचुरल घर बहुत जरूरी हैं। नारियल से बने घर:
- पर्यावरण को सुरक्षित रखते हैं
- लोगों की सेहत के लिए अच्छे होते हैं
- कम खर्च में बन जाते हैं
- भविष्य के लिए टिकाऊ समाधान हैं
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🏠 नारियल से बना घर: कीमत, फायदे और आसान जानकारी

आज के समय में कम बजट में घर बनाना हर किसी का सपना होता है। ऐसे में नारियल से बना घर (Coconut House) एक बहुत अच्छा और सस्ता विकल्प बनकर सामने आ रहा है। यह घर उन टिन शेड वाले घरों से कहीं बेहतर है, जो अक्सर झुग्गी या बिना प्लान के बने इलाकों में देखने को मिलते हैं।
💰 नारियल से बने घर की कीमत (Coconut House Price)
अगर हम कीमत की बात करें, तो करीब 64 स्क्वायर फीट का नारियल से बना घर लगभग ₹15,000 में तैयार हो जाता है। इतनी कम कीमत में एक सुरक्षित और रहने लायक घर मिल जाना बहुत बड़ी बात है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका बजट कम होता है।
🔨 बनाना है आसान, खास जानकारी की जरूरत नहीं
इस घर को बनाना बहुत आसान है। जिसे थोड़ा-बहुत निर्माण का ज्ञान है, वह इसे खुद भी बना सकता है। इसके लिए किसी बड़ी मशीन या ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए यह घर गांव, छोटे शहर और गरीब इलाकों के लिए एक बढ़िया विकल्प है।
🌱 नारियल से बने घर के फायदे
- यह टिन शेड से ज्यादा मजबूत और सुरक्षित होता है
- गर्मी में अंदर ठंडा रहता है
- कम पैसों में जल्दी बन जाता है
- पर्यावरण के लिए नुकसानदायक नहीं है
- गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अच्छा विकल्प
🥥 नारियल से बने घरों के फायदे (Benefits of Coconut Homes)

आज के समय में लोग ऐसे घरों की तलाश कर रहे हैं जो सस्ते, ठंडे, और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों। इसी दिशा में नारियल से बने घर (Coconut Homes) एक नया और बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं। आइए आसान भाषा में इसके फायदे समझते हैं।
🌱 1. पर्यावरण के लिए सुरक्षित (Eco-Friendly)
नारियल से बने घर पूरी तरह प्रकृति के अनुकूल होते हैं। इनमें
कम उपयोग, दोबारा इस्तेमाल, और री-यूज़ के सिद्धांत को अपनाया जाता है।
- इन घरों में नारियल के खोल, मिट्टी, लकड़ी, और धातु जैसे प्राकृतिक और दोबारा उपयोग होने वाले सामान का इस्तेमाल किया जाता है।
- नारियल का खोल एक तरह का कचरा माना जाता है, लेकिन इसे घर बनाने में उपयोग करके प्रदूषण कम किया जाता है।
- अब बिल्डर लोग नारियल के रेशों से खोखले कंक्रीट ब्लॉक बनाने पर भी काम कर रहे हैं, जिससे सीमेंट और पत्थर की जरूरत कम हो जाती है।
इस तरह नारियल से बने घर प्रकृति को नुकसान नहीं पहुँचाते और पर्यावरण को सुरक्षित रखते हैं।
❄️ 2. घर रहता है ठंडा (Natural Air Cooler)
नारियल और मिट्टी से बने घर नेचुरल तरीके से ठंडे रहते हैं।
- प्राकृतिक सामग्री होने की वजह से घर के अंदर गर्मी कम रहती है।
- यह घर गर्मियों में भी ठंडा और आरामदायक माहौल देते हैं।
- बिना किसी मशीन के यह घर नेचुरल एयर कूलर की तरह काम करते हैं।
⚡ 3. बिजली और पानी की बचत (Energy Saving)
नारियल के खोल में छोटे-छोटे हवा के रास्ते होते हैं, जिससे हवा आसानी से अंदर-बाहर होती रहती है।
- इन्हें छत और दीवारों में लगाने से घर की गर्मी कम हो जाती है।
- घर का तापमान करीब 4 से 5 डिग्री तक कम हो जाता है।
- इससे एसी और कूलर की जरूरत नहीं पड़ती, जो ज्यादा बिजली और पानी खर्च करते हैं।
आने वाले समय में इन घरों को सोलर पैनल से जोड़ने की भी योजना है, जिससे बिजली की खपत और भी कम हो जाएगी।
🌞 4. कम खर्च और ज्यादा फायदा
- बिजली का बिल कम आता है
- पानी की बचत होती है
- लंबे समय तक घर ठंडा रहता है
- सेहत के लिए भी अच्छा माहौल मिलता है
नारियल के खोल का सही इस्तेमाल क्यों ज़रूरी है?
भारत में नारियल का इस्तेमाल बहुत ज़्यादा होता है। पूजा-पाठ, ठंडा नारियल पानी और खाने-पीने में नारियल आम है। लेकिन इसके बाद बचने वाले नारियल के खोल अगर सही तरीके से नहीं फेंके जाएँ, तो ये कई समस्याएँ पैदा कर सकते हैं।
अक्सर देखा जाता है कि लोग नारियल के खोल को यूँ ही सड़क, नाली या खाली जगह पर फेंक देते हैं। बारिश के मौसम में यही खोल नालियों को जाम कर देते हैं, जिससे पानी भर जाता है और गंदगी फैलती है। इसके अलावा नारियल के खोल में पानी जमा हो जाता है, जिससे मच्छर पनपते हैं। यही मच्छर आगे चलकर डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं।
नारियल के खोल को खाद बनाना मुश्किल क्यों है?
नारियल के खोल बहुत सख्त होते हैं। ये जल्दी गलते नहीं हैं, इसलिए इन्हें खाद बनाना आसान नहीं होता। यही वजह है कि लोग इन्हें बेकार समझकर फेंक देते हैं। लेकिन यही चीज़ दो लोगों — अडवाणी और त्रिवेदी — के लिए एक नया आइडिया बनी।
नारियल के खोल से घर और फर्नीचर बनाने का आइडिया

अडवाणी और त्रिवेदी ने सोचा कि जब नारियल के खोल को गलाना मुश्किल है, तो क्यों न इसे दोबारा इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने नारियल के खोल को सुखाकर उससे घर बनाने, फर्नीचर और खिलौने बनाने का तरीका अपनाया।
उनका मानना है कि आज पूरी दुनिया में पेड़ों की कटाई बहुत तेज़ी से हो रही है, जिसका सीधा असर जलवायु परिवर्तन पर पड़ रहा है। लकड़ी का इस्तेमाल फर्नीचर बनाने और जलाने के लिए किया जाता है। अगर हम कच्चे नारियल के खोल को सही तरीके से सुखाकर उसका इस्तेमाल करें, तो लकड़ी की ज़रूरत कम होगी।
इससे पर्यावरण को क्या फायदा होगा?
- 🌱 पेड़ों की कटाई कम होगी
- 🌱 पर्यावरण को कम नुकसान होगा
- 🌱 कचरे की समस्या घटेगी
- 🌱 मच्छरों से फैलने वाली बीमारियाँ कम होंगी
- 🌱 सस्ते और टिकाऊ घर व फर्नीचर बन सकेंगे
✅ निष्कर्ष
नारियल के खोल से बना घर भविष्य के लिए एक समझदारी भरा कदम है। यह न सिर्फ सस्ता और टिकाऊ है, बल्कि प्रदूषण कम करने में भी मदद करता है। अगर ऐसे घरों को बढ़ावा दिया जाए, तो सस्ते मकान, साफ हवा और बेहतर जीवन तीनों लक्ष्य एक साथ पूरे हो सकते हैं।
अक्षर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. नारियल के खोल से बना घर क्या होता है?
नारियल के खोल से बना घर एक ऐसा घर होता है, जिसमें नारियल के छिलकों, मिट्टी और बेकार चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है। यह घर पर्यावरण के लिए सुरक्षित होता है और कम खर्च में तैयार हो जाता है।
2. क्या नारियल से बना घर मजबूत होता है?
हाँ, सही तरीके से तैयार किया गया नारियल का खोल सूखने के बाद काफी मजबूत हो जाता है। यह लकड़ी जैसा काम करता है और छोटे घरों के लिए पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।
3. नारियल से बने घर की कीमत कितनी होती है?
करीब 64 स्क्वायर फीट का नारियल से बना घर लगभग ₹15,000 में बन सकता है। कीमत जगह, डिज़ाइन और इस्तेमाल की गई सामग्री पर निर्भर करती है, फिर भी यह बहुत सस्ता विकल्प है।
4. क्या यह घर गर्मियों में ठंडा रहता है?
हाँ, नारियल और मिट्टी से बनी दीवारों में हवा के लिए जगह होती है। इससे घर के अंदर का तापमान कम रहता है और एसी या कूलर की जरूरत कम पड़ती है।
5. क्या नारियल के खोल से बने घर प्रदूषण कम करते हैं?
बिलकुल। इनमें सीमेंट और ईंट का कम इस्तेमाल होता है। बेकार चीज़ों का दोबारा उपयोग किया जाता है, जिससे कचरा और निर्माण से होने वाला प्रदूषण दोनों कम होते हैं।
6. क्या कोई आम व्यक्ति ऐसा घर बना सकता है?
हाँ, इस घर को बनाना आसान है। थोड़ी-बहुत निर्माण की जानकारी वाला व्यक्ति भी इसे बना सकता है। इसमें बड़ी मशीनों या ज्यादा तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं होती।
7. नारियल के खोल का सही इस्तेमाल क्यों ज़रूरी है?
नारियल के खोल अगर यूँ ही फेंक दिए जाएँ, तो नाली जाम होती है और मच्छर पनपते हैं। इनका सही इस्तेमाल करने से बीमारी, कचरा और पेड़ों की कटाई – तीनों समस्याएँ कम होती हैं।


